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वाचन संस्कृती

अनूपकुमार पुरोहित धामनगांव रेलवे ई लर्निंग के युग मे युवाओं को वाचन संस्कृति के प्रती जागरूक कराना अत्याधिक महत्वपूर्ण है किंतू राजकीय तथा प्रशासनिक अनस्था के चलते आज का युवा हमारी प्राचीन वाचन संस्कृति से अनभिज्ञ है. पुस्तकालयो के माध्यम से पाठकों के आवश्यकतानुसार पठनसामग्री का संकलन किया जाता है. जो लोग स्कूलों या कालेजों में नहीं पढ़ते, जो साधारण पढ़े लिखे हैं, अपना निजी व्यवसाय करते हैं अथवा जिनकी पढ़ने की अभिलाषा है और पुस्तकें नहीं खरीद सकते तथा अपनी रुचि का साहित्य पढ़ना चाहते हैं, ऐसे वर्गों की रुचि को ध्यान में रखकर जनसाधारण की पुस्तकों की माँग सार्वजनिक पुस्तकालय ही पूरी कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनी, वादविवाद, शिक्षाप्रद चलचित्र प्रदर्शन, महत्वपूर्ण विषयों पर भाषण आदि का भी प्रबंध भी सार्वजनिक पुस्तकालयो के माध्यम से पूर्व मे होता रहा हैं किंतू हाल फिलहाल के वर्षो मे पुस्तकालयों के प्रती अनास्थ बढ़ी है. वास्तव में लोक पुस्तकालय जनता के विश्वविद्यालय हैं, जो बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक के उपयोग के लिए खुले रहते है और साक्षरता का प्रसार करते है. राज्य सरकार द्वा...